Saturday, January 26, 2013

क़द्र रौशनी की

क़द्र रौशनी की 

जिन आँखों ने देखे थे सपने चाँद सितारों के
वो जल-जल कर आज अग्नि की धार बने हैं

सपने हों या तारें हों, अक्सर टूटा ही करते हैं
हो क्यों विस्मित जो टूट आज वो अंगार बने हैं

अंगारों का काम है जलना, जला देना, पर आशाएं    
जो दीप जलें उनके तो रौशन मन संसार बने हैं

संसार का नियम यही कुछ निश्चित नहीं जग में
किस जीवन की बगिया में अब तक बहार बने हैं  

वो बहार कैसी बहार, बहती जिसमे आँधी गिरते ओले
उस नग्न बाग़ का है क्या यश, जो बस खार बने हैं

ये खार ही है सच जीवन का, बंधुवर मान लो तुम
जो चला हँसते इसपर जीवन में, उसकी ही रफ़्तार बने है

रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं 

(निहार रंजन, सेंट्रल, १-२६-२०१३)

24 comments:

  1. रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
    क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं
    ...यह तो शाश्वत सच है ....सुन्दर प्रस्तुति ...!

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  2. भावो को संजोये रचना......

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  3. अंगारों का काम है जलना, जला देना, पर आशाएं
    जो दीप जलें उनके तो रौशन मन संसार बने हैं

    बहुत खूब,,,, सुन्दर रचना !

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  4. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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  5. आप की ये रचना शुकरवार यानी 01/02/2013 को पर लिंक की जा रही है...

    सूचनार्थ

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    1. हलचल में इस पोस्ट को स्थान देने के लिए आपका आभारी हूँ.

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  6. रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
    क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं
    सार्थक अभिव्यक्ति !!

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  7. वाह ....बहुत बढ़िया निहार जी...
    ये खार ही है सच जीवन का, बंधुवर मान लो तुम
    जो चला हँसते इसपर जीवन में, उसकी ही रफ़्तार बने हैं

    बेहतरीन भाव...
    अनु

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  8. बहुत अच्छी और कडवी हकीकत ..
    वो बहार कैसा बहार, बहती जिसमे आँधी गिरते ओले
    उस नग्न बाग़ का है क्या यश, जो बस खार बने हैं
    इसमें वो बहार कैसी बहार ...मेरे हिसाब से सही रहेगा ...अन्यथा न लें ...

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    1. सुधार के लिए आपका धन्यवाद.

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  9. संसार के नियम, कुछ निश्चित नहीं जग में
    किस जीवन की बगिया में, कब तक बहार बने


    बहुत उम्दा

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  10. ये खार ही है सच जीवन का, बंधुवर मान लो तुम
    जो चला हँसते इसपर जीवन में, उसकी ही रफ़्तार बने है

    ....बिल्कुल सच..बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति..

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  11. I loved the depth in these lines,

    "सपने हों या तारें हों, अक्सर टूटा ही करते हैं
    हो क्यों विस्मित जो टूट आज वो अंगार बने हैं"

    A beautiful and a thought provoking poem.

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  12. विरोधाभास में ही सत्य छिपा है..

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  13. Gahrai liye shabd aur bhavo ki sundar abhivyakti...
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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  14. रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
    क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं
    बहुत ही प्रभावशाली अभिव्यक्ति..

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  15. रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
    क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं
    बहुत ही प्रभावशाली अभिव्यक्ति. वाह . हार्दिक आभार .

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  16. आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 1 फरवरी की नई पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...
    आप भी इस हलचल में आकर इस की शोभा पढ़ाएं।
    भूलना मत

    htp://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com
    इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है।

    सूचनार्थ।

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  17. रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
    क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं
    खूब कही..... अर्थपूर्ण भाव

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  18. वाह बहुत ही उम्दा।

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  19. sunder bhavpoorn rachna ,nirantar likhiye,jeevan milega anobhootiyo ko

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  20. रफ़्तार में रहो रत लेकिन, तुम यह मत भूलो मन
    क़द्र रौशनी की हो सबको, इसीलिए अन्धकार बने हैं...बहुत सुंदर

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  21. अंगारों का काम है जलना, जला देना, पर आशाएं
    जो दीप जलें उनके तो रौशन मन संसार बने हैं ..

    सच है आशाओं के दीप जलने पे जीवन रौशन हो जाता है ... बहुत खूब लिखा है ....

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