Wednesday, October 3, 2012

कैसे कह दूँ भारत महान ?




इस कविता को पोस्ट करने से पहले यह बता दूँ की अपनी मिट्टी के कण-कण से मुझे बेहद प्यार है. यह देख कर बहुत अच्छा अनुभव होता है कि देश विकासरत है. हाँ कुछ ऐसी समस्याएँ जरूर हैं जिन्हें जिनपर सबको ध्यान देने की ज़रुरत है ताकि हर मायने में अपने देश को महान कहा जा सके. जो बातें अपने देश के बारे में  महान हैं उस पर सवाल नहीं है  यहाँ. ना ही वो कम होने वाले हैं. सवाल है यहाँ उन बातों पर जिनके बारे कदम उठाने की ज़रुरत है.


कैसे कह दूँ भारत महान?


जहाँ आज भी मर जाती बेटी
जीवन में आने से  पहले 
होती कलंकित वो जननी
कुलदीपक जो ना जन ले
हर क्षण वह फिर जलती है
क्या है मुझे इसका अभिमान?
कैसे कह दूँ भारत महान?

जहाँ आज भी  वर्ण-विभेद 
एक सामाजिक रोग है
छुआछूत का दंश सह रहे
अब भी करोड़ो लोग हैं
जब तक ना हो इन रोगों का
एक व्यापक समाधान
कैसे कह दूँ भारत महान?

 जहाँ आज भी एक अदना सा जन
पिसता अफसर बेईमानों से
हो जाती दफ़न जिनकी पीड़ा  
कुछ अखबारी हंगामों में  
और जंग कानूनी लड़ते 
हो जाते वो निष्प्राण
कैसे कह दूँ भारत महान?

जहां है अब भी अबला नारी
जिसका शोभा है लाचारी  
धर्म, अशिक्षा से बंधीं
अब भी कैद है वो बेचारी
वो बिना बताये दर्द-ए-दिल
मर जाती सीकर जुबान
कैसे कह दूँ भारत महान?

जहाँ आज भी  लड़ते है कुछ लोग
अपनी मज़हब की शान पर
और रह रह सुलगा देते हैं 
घर एक-दूसरे का जान कर
फिर बहती है खून की नदियाँ
जिसमे आखिर मरता है “इंसान”
कैसे कह दूँ भारत महान?

जहाँ आज भी स्तनों का उभार
लड़की  को औरत बनाती है
और गुड़िया के संग संग
एक बच्चा भी दे जाती है
फिर साल बीसवां लगते ही
विधवा होकर होता उनका बलिदान*
कैसे कह दूँ भारत महान?

-निहार रंजन (१५-७-२०१२)

* एक सच्ची कथा व्यथा की जिससे मैं अवगत हुआ दो तीन महीने पहले. एक बच्ची जो १५ साल की उम्र में पत्नी बनती है, १७ साल की उम्र में माँ और २०वाँ साल आते आते विधवा. फिर उसका जीवन ऐसे समाज में गुजरना है जहाँ पुनर्विवाह की अनुमति नहीं है.


Photo Courtesy: http://www.punjabigraphics.com/pg/india/page/13/

13 comments:

  1. हमारा भारत महान है, भले ही हमारे समाज में कुछ बुराइयां आ गयी हो, इस से हमारे देश की महानता कम नहीं हो जाती है। हर बुराई दूर की जा सकती है, कमियां किस समाज में नहीं है। जो भारत में है वो शायद कहीं नहीं है। भारत कैसे महान है, 7 अक्तुबर को मेरे ब्लौग पर पढ़ना http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com

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    1. कुलदीप सिंह जी, आपके ब्लॉग का इंतज़ार रहेगा. मेरे कहने का अभिप्राय यह नहीं था कि इन बातों कि वजह से अपना गौरवशाली अतीत मिट जाएगा. लेकिन जब तक समाज में ये रोग रहेंगे, हम उसे आदर्श समाज का दर्जा नहीं दे सकते. हाँ हर समाज में दिक्कतें होती है और ये दुनिया में हर जगह किसी ना किसी रूप में विद्यमान हैं. लेकिन जहाँ भी कुछ इस तरह के रोग है उस समाज को मैं महान नहीं मानूँगा. अब महान कि परिभाषा क्या है उस पर अपनी व्यक्तिगत राय हो सकती है.

      आखिर मैं इतना कह दूँ कि मुझे भी अपनी मिट्टी के सूक्ष्मतम अणु से भी उतना ही प्यार है जितना किसी और सच्चे देशवासी को.

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  2. भाव मन छू गए ...
    सच ही है ...एक जागृति की अत्यंत आवश्यकता है ...हमारे देश मे ...!!

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  3. हमारे ही तथाकथित महान कहे जाने वाले परिवेश की व्यथा कथा ...दुखद .... पर कटु सत्य .....

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  4. http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/10/2.html

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    1. पोस्ट शामिल करने के लिए शुक्रिया.

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  5. कटु सत्य को कहती प्रभावशाली रचना

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  6. विचारणीय रचना.....

    कड़वा है मगर सच तो यही है....
    सार्थक रचना.
    सादर
    अनु

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  7. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 11-10 -2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....शाम है धुआँ धुआँ और गूंगा चाँद । .

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    1. शुक्रिया संगीता जी नयी पुरानी हलचल में मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए.

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  8. जब संतान स्वार्थी निकले और माँ की उपेक्षा करे तो और क्या होगा?

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  9. bahut hi marmik rachna jo katu saty ko ujagar karti

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  10. वाह बहुत खूबसूरती से नारी के पक्ष में लिखी सुन्दर और सशक्त रचना बहुत सुन्दर विवरण |

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